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Last Updated: Fri, 03 Sep 2010 13:45:31 +0530

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Sun, 07 Feb 2010 19:35:00 +0000

त्रिवेणी संगम मेला स्थल पर संत-समागम शुरू



इस अवसर पर संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि संतो के माध्यम से इस क्षेत्र में धार्मिक एवं आध्यात्मिक संदेश प्रवाहित होगा।
36गढ़ डाट इन

रायपुर, 7 फरवरी (36गढ़ डाट इन)-छत्तीसगढ़ के प्रयागराज राजिम के त्रिवेणी संगम में कल शनिवार से देश भर से पधारे साधु-संतों की उपस्थिति में संत समागम का भव्य शुभारंम हुआ।

भगवान राजीव लोचन की आरती के साथ संत-समागम की शुरूआत हुई। इससे पहले गंगा आरती का आयोजन किया गया। राजीव लोचन मंदिर के पास बने विशाल मंच में इस अवसर पर अनेक साधु-संतों ने अपने आर्शीवचन भी दिए।    
 
इस अवसर पर  संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि संतो के माध्यम से इस क्षेत्र में धार्मिक एवं आध्यात्मिक संदेश प्रवाहित होगा।

उन्होने कहा कि यहां आगामी 12 फरवरी तक विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के संतो के श्रीमुख से धर्म की गंगा प्रवाहित होगी जिसका पुण्य लाभ यहां के लोगों को मिलेगा।

श्री अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से साधु संतो का अभिनंदन करते हुए कहा कि राजिम कुंभ के माध्यम से आस्था और भक्ति का प्रकटीकरण होता है।

 छत्तीसगढ़ की धरती माता कौशिल्या की जन्म भूमि है। छत्तीसगढ़ को सबसे खुशहाल राज्य बनाने के लिए कुंभ की परंपरा शुरू हुई है। साधु संतो के आशीर्वाद और जनता के सहयोग से राजिम कुंभ निरंतर प्रसिध्द हो रहा है।

 कृषि मंत्री श्री चंद्रशेखर साहू ने कहा कि राजिम वैष्णव और शैव धर्म का संगम स्थल है। यहां आदिवासी संस्कृति, ऋषि संस्कृति और कृषि संस्कृति एक साथ दिखाई देती है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विधान सभा के नेता प्रतिपक्ष श्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि पिछले 6 वर्षों से आयोजित हो रहे राजिम कुंभ को साधु-संतो का आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है।

आज संत समागम के शुभारंभ अवसर पर द्वारिका-शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती महाराज ने अपने संदेश में कहा है कि राजिम के प्राचीन मेले को कुंभ का दर्जा देना वास्तविक कुंभ को गौरवांवित करना है।

श्री चौबे ने कहा कि शंकराचार्य जी का यह संदेश हमारे लिए सौभाग्य की बात है। श्री चौबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भूमि देवभूमि है, यहां के जनमानस में विदुर, शबरी और केंवट राज की भक्ति समाहित है।

श्री चौबे ने कहा कि राजिम कुंभ में शंकराचार्यों और साधु संतो का आगमन होता है, इससे पूरे राज्य में उत्साह का वातावरण रहता है और जनता में खुशहाली आती है।

श्री चौबे ने कहा कि हम छत्तीसगढ़ को हिन्दुस्तान का सबसे खुशहाल राज्य बनाना चाहते हैं। इसके लिए साधु संतो का आशीर्वाद निरंतर मिलता रहे यही हमारी इच्छा हैं।

प्रदेष सरकार राजिम कुंभ को प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में होने वाले कुंभ के समान प्रतिष्ठित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

संत समागम का शुभारंभ समारोह द्वारिका-शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य श्री स्वरूपानंद जी सरस्वती के विशेष सानिध्य में होने वाला था।

स्वास्थगत कारणों से शंकराचार्य श्री स्वरूपानंद जी समारोह में नहीं आ पाए। समारोह में राजिम कुम्भ के संबंध में शंकराचार्य द्वारा दिए गए संदेश का पठन किया गया।

शंकराचार्य श्री स्वरूपानंद जी ने अपने संदेश में कहा कि राजिम छत्तीसगढ़ का परम पुण्य क्षेत्र है। राजिम में प्राचीन काल से ही माघ पूर्णिमा के अवसर पर पुन्नी मेला की परम्परा है, जो इस आधुनिक युग में भी संरक्षित हो रही है।

शंकराचार्य ने कहा कि मेला वह इकाई है, जहां यत्र-तत्र फैली भारतीय संस्कृति की विविधता एक पवित्र स्थान पर शुभ-मुहूर्त में एकत्रित होती है।

विभिन्न विचारों और क्रिया-कलापों के एक स्थान पर समावेंष होने से हमारी आंतरिक-षक्ति पुष्ट होती है। राजिम मेला को कुंभ पद से उपमित किया जाना वास्तविक कुंभ-मेला को गौरवान्वित करना है।

 इस अवसर पर सांसद श्री चंदूलाल साहू, कुरूद विधायक श्री लेखराम साहू सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों, साधू-संतों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।

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