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Last Updated: Mon, 27 Mar 2017 15:31:40 -0500

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Sun, 18 Sep 2011 21:22:00 +0000

बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए कार्य करने की जरूरत



बाल कल्याण संबंधी संस्थाओं को और अधिक सशक्त तथा सक्रिय बनाने पर जोर देते हुए कहा कि मैं यहां बाल अधिकारों के संबंध में न्यायिक अधिकारियों, प्रशासकीय अधिकारियों और समाज के जिम्मेदार लोगों की संवेदना और अंतर्आत्मा को जगाने आया हूँ।
36गढ़ डाट इन
रायपुर,18 सितम्बर(36गढ़ डाट इन) सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक
अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री अल्तमस कबीर ने कल शाम यहां नवीन विश्राम भवन में बाल अधिकारों का संरक्षण, चुनौतियां
और समाधान विषय पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी में बाल कल्याण संबंधी संस्थाओं को और अधिक सशक्त तथा सक्रिय बनाने पर जोर देते हुए कहा कि मैं यहां बाल अधिकारों के संबंध में न्यायिक अधिकारियों, प्रशासकीय अधिकारियों और समाज के जिम्मेदार लोगों की संवेदना और अंतर्आत्मा को जगाने आया हूँ।

न्यायमूर्ति श्री कबीर ने मुख्य अतिथि की आसंदी से लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल अधिकारों के संरक्षण के
लिए समाज के हर तबके को सजग होकर कार्य करने की जरूरत है।

बाल अधिकारों पर चर्चा करने के साथ-साथ इससे संबंधित परकरणों पर तत्परतापूर्वक कार्रवाई भी होना चाहिए। एक घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्लेटफार्म टिकट नहीं होने के कारण एक छोटी सी बच्ची सात वर्ष तक
एक बाल सम्प्रेक्षण गृह में रही।

इस तरह उस मासूम बच्ची को बिना किसी गंभीर अपराध के इतने वर्षों तक अपने माता-पिता के प्यार और दुलार से वंचित
रहना पड़ा।

उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को अत्यंत संवेदनशील तरीके से कार्य करने और किशोर न्यायालयों में आने वाले प्रकरणों का
निपटारा अधिकतम छह माह में कर लेने का सुझाव दिया। ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। श्री कबीर ने कहा कि समाज में आज अनेक ऐसे लोग और संस्थाएं है जो बाल कल्याण की दिशा में अच्छा कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने देश के संविधान में बाल अधिकारों के लिए किए गए प्रावधानों की चर्चा करते हुए बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा
प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2011 को 'बाल अधिकार संरक्षण' वर्ष घोषित किया गया है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष श्री यशंवत जैन ने कहा कि न्यायमूर्ति
श्री कबीर के मार्गदर्शन में आयोग को अच्छा कार्य करने के लिए एक सही दिशा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा बच्चों को समुचित वातावरण देने के लिए सकारात्मक पहल की जाएगी।

कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष
न्यायमूर्ति श्री आई.एम. कुद्दूसी, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य श्री आनंद सिंघल, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार श्री संजय कुमार तिवारी, छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग के सदस्य
श्री पी.पी. सोती और समाज कल्याण विभाग के सचिव श्री के.डी.पी. राव ने भी संबोधित किया।

सेमीनार में छत्तीसगढ़ के महाधिवक्ता श्री देवराज सुराना, विभिन्न जिलों से आए जिला और सत्र न्यायाधीश, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी, चाइल्ड हेल्प लाईन, यूनिसेफ तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि सहित विधि के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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