Sat, 06 Mar 2010 10:40:00 +0000 युवाओं की दक्षता का विकास करने की जरूरत: राज्यपाल
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त शुक्रवार रायपुर में भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा 'कार्पोरेट सोषल रिस्पांसब्लिटी फॉर सस्टेनेबल डेव्हलपमेंट' विषय पर आयोजित सम्मेलन में शामिल हुए।
36गढ़ डाट इन
रायपुर,6 मार्च(36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त शुक्रवार रायपुर में भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा 'कार्पोरेट सोषल रिस्पांसब्लिटी फॉर सस्टेनेबल डेव्हलपमेंट' विषय पर आयोजित सम्मेलन में शामिल हुए।
इस अवसर पर श्री दत्त ने अपने उद्बोधन में कहा कि सामाजिक गतिविधियों पर किया गया व्यय कोई दान नहीं है, बल्कि एक निवेष है, जिससे उद्योगों के विकास के साथ सामाजिक दायित्वों का निर्वहन भी होता है।
कार्पोरेट सोषल रिस्पांसब्लिटी आज के समय की मांग है। हमारा देष हर क्षेत्र में विकास की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि उद्योग न केवल रोजगार के अवसरों का सृजन करते हैं, बल्कि दक्षता का विकास भी करते हैं। हमें युवाओं की दक्षता का विकास करने की जरूरत है।
राज्यपाल दत्त ने कहा कि भारत, अर्थव्यवस्था और तकनीकी के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ देष है। जन-सामान्य की सक्रिय सहभागिता से विकास की गति तेज होगी।
उन्होंने कहा कि जन-सामान्य के जीवन स्तर को बढ़ाने के साथ स्वास्थ्य, जल, स्वच्छता सहित कई क्षेत्रों में कार्य किए जाने की भी जरूरत है। कार्पोरेट सेक्टर इन आधारभूत क्षेत्रों में अपनी सेवाएँ दे सकते हैं।
कार्पोरेट सोषल रिस्पांसब्लिटी के क्षेत्र में कई चुनौतियाँ हैं, लेकिन सामाजिक दायित्वों को पूर्ण करने के प्रतिबध्द प्रयासों से इस लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकती है।
इस अवसर पर उद्योग सचिव श्री पी. रमेष कुमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति में यह परम्परा रही है कि समुदाय से ग्रहण करने के बदले कुछ लौटायें।
उद्योग जगत देष व समाज से विभिन्न संसाधन लेकर अपने उद्योगों की स्थापना एवं विकास करता है, लेकिन इसके साथ ही सामाजिक दायित्वों को पूरा करने की भी जिम्मेदारी उस पर होती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग परिसंघ षिक्षा, स्वास्थ्य, मोबाइल हॉस्पिटल सहित जनसामान्य में विभिन्न बीमारियों से बचाव एवं उनकी रोकथाम की दिषा में प्रयास करने के साथ-साथ जनजागृति भी उत्पन्न करे।
उन्होंने सुझाव दिया कि औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय जनसमुदाय की आकांक्षाओं एवं जरूरतों के अनुरूप सामाजिक दायित्वों को पूरा करने और ऐसे कार्यक्षेत्रों का एक 'मॉडल' भी होना चाहिए, जिसका अन्य क्षेत्रों में अनुसरण हो सके।
उद्योग सचिव ने कहा कि उद्योग परिसंघ किसी परिक्षेत्र में सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन को पूरा करते समय जिला, विकासखण्ड एवं स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों से सहयोग लेकर उन्हें मूर्त रूप दे सकते हैं। भारतीय उद्योग परिसंघ पूर्वी क्षेत्र के डिप्टी चैयरमैन श्री कुरूष एन. ग्रांट ने कहा कि उद्योग जगत अपने सामाजिक जवाबदेहियों को निभाने के साथ कर्मचारियों और समुदायों के कल्याण के प्रति भी सजग है।
उन्होंने कहा कि उद्योग, मूलत: विकास से सम्बंधित होता है, लेकिन सामाजिक एवं मानवीय जरूरतों के लिए भी उसकी प्रतिबध्दता बनती है।
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