छत्ताीसगढ़ की 2010-11 की राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की योजना गांवों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनायी गयी है।
रायपुर,18 फरवरी (36गढ़ डाट इन) छत्ताीसगढ़ की 2010-11 की राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की योजना गांवों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनायी गयी है।
इसमें प्रजनन शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता एवं पदस्थापना जैसे ग्रामीण चिकित्सा सहायक, रूरल मेडिकल कोर के लिए विशेष प्रावधान किया गया है।
संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने सम्पूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करने और स्वास्थ्य अधोसंरचना को बढ़ावा देने के प्रावधान किए गए है।
मुख्य सचिव श्री पी. जॉय उम्मेन की अध्यक्षता में आज यहां राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की शासी निकाय की बैठक में वर्ष 2010-11 के परियोजना क्रियान्वयन प्लान को मंजूरी दी गई।
इस प्लान को नई दिल्ली में होने वाली बैठक में अन्तिम अनुमोदन के लिए भेजा जा रहा है। यह योजना 546 करोड़ 26 लाख रूपये की है। वर्ष 2010-11 की यह योजना गांवों की आवश्यकतानुसार बनायी गई है।
गांव के प्लान को विकासखण्ड एवं जिले के प्लान में समाहित किया गया है। इन सबको मिलाकर राज्य का प्लान बनाया गया है। बैठक में प्रमुख सचिव वित्त श्री अजय सिंह, सचिव स्वास्थ्य श्री विकासशील, आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए.टी. दाबके सहित शासी निकाय के अन्य सदस्य उपस्थित थे।
बैठक में बताया गया कि 2010-11 की योजना में स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के अनेक प्रावधान किए गए हैं।
जिसमें 100 उप स्वास्थ्य केन्द्रों भवन के लिए 20 करोड़, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में लेबर रूम के लिए 7.66 करोड़, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 25 करोड़ का प्रावधान है।
राज्य एवं जिलों में दवाईयों के वैज्ञानिक तरीके से रख-रखाव के लिए वेयर हाउस बनाने के लिए 10 करोड़ रूपए रखे गये हैं जिससे दवाईयों का समुचित भण्डारण एवं सूचीकरण किया जा सके।
अप्रैल 2010 से गर्भवती माताओं एवं बच्चों का रिकार्ड ठीक तरीके से रखने के लिए प्रत्येक गांव के लिए एक एम.सी.एच. रजिस्टर बनाया जाएगा ताकि गर्भवती माताओं एवं बच्चों को सभी योजनाओं का समुचित लाभ प्राप्त हो सके।
योजना में छत्ताीसगढ़ रूरल मेडिकल कोर (सीआरएमसी) के लिए 9 करोड़ 63 लाख रूपए रखे गये हैं। इसमें राज्य के दूरूह और अति दूरूह क्षेत्रों के डॉक्टरों और नर्सो को विशेष प्रोत्साहन पैकेज दिया जाएगा।
ऐसे 472 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, 76 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और 07 अस्पताल चिन्हित किए गए हैं। इसमें एक हजार 63 डॉक्टरों और 327 स्टॉफ नर्स का पंजीयन किया गया है।
स्वास्थ्य केन्द्रों की जीवन दीप समितियों के 10.29 करोड़ और मितानिन के प्रशिक्षण और दवा पेटी आदि के लिए 25.31 करोड़ रूपए रखे गये हैं।
बैठक में बताया गया कि 2010-11 से प्रदेश में बाल सुपोषण योजना प्रारंभ की जाएगी। इसके लिए 20 स्वास्थ्य केन्द्रों का चयन किया गया है।
मुख्य सचिव ने इस योजना के लिए महिला एवं बाल विकास से समन्वय करने के निर्देश दिए।
स्कूल हेल्थ प्रोग्राम के तहत शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और स्कूली बच्चों के हेल्थ कार्ड बनाए जाएंगे। जशपुर में वर्ष 2009-10 में स्नेक बाईट केयर कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था।
जिसे इस वर्ष सभी जिलों में लागू किया जाएगा। बाल श्रवण योजना के तहत बच्चों में काक्लिया इम्पलांट सर्जरी के लिए एक करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया है।
इसके साथ ही आदिम जनजाति समूहों (प्रिमिटिव ट्रायबल ग्रुप) के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया जाएगा।
इस योजना में नक्सल प्रभावित जिलों के लिए 75 करोड़ रूपए का प्रावधान अलग से रखा गया है। बैठक में श्री विकासशील ने बताया कि वर्ष 2009 में शिशु मृत्यु दर 57 है जबकि 2007 में यह दर 61 थी।
इसी प्रकार मातृ मृत्यु दर 2009 में 335 प्रति लाख जीवित बच्चों है। गत वर्ष 4.83 लाख बच्चों को बी.सी.जी. और 4.13 लाख बच्चों को बी.पी.टी. के टीके लगाए गए थे।
चार लाख 30 हजार बच्चों को पोलियो की दवा पिलायी गई। बाल हृदय सुरक्षा योजना के तहत लगभग साढ़े आठ सौ बच्चों के आपरेशन किए गए।
बैठक में सचिव नगरीय प्रशासन श्री जवाहर श्रीवास्तव, सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री दिनेश श्रीवास्तव, विशेष सचिव स्वास्थ्य श्री अजय पाण्डेय, संचालक स्वास्थ्य श्री पी. अम्बलगन, केयर इंडिया के प्रतिनिधि एवं अन्य सदस्य उपस्थित थे।
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