हाथियों का गांव बसाने की योजना अधर में लटकी है। परिणाम है कि जन और धन की निरंतर हानि जारी है।
रायपुर, 3 फरवरी 10 (36गढ़ डाट इन) हाथियों का गांव बसाने की राज्य सरकार की योजना अधर में लटकी है। परिणाम है कि जन और धन की निरंतर हानि जारी है।
उल्लेख्य है कि एक स्वयंसेवी संस्था के इस प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने रजामंदी व्यक्त किया था। इसके पीछे मंशा थी कि जंगली हाथियों के उत्पात से आम लोगों को छुटकारा दिलाना।
इसके अलावा इस बहुमूल्य वन्य प्राणी का संरक्षण एवं संवर्धन को भी इससे बढ़ावा मिलता। काबिले जिक्र है कि गत वर्ष हाथियों के हमलों में 29 लोग अपनी जान से हाथ धो चुके हैं।
इसमें फसलों का भी भारी नुकसान हुआ। राज्य सरकार बतौर हर्जाना 42 लाख रुपया की वितरण कर चुकी है। राज्य के उत्तर-पूर्व क्षेत्र के सरगुजा, जशपुर, कोरिया, कोरबा एवं रायगढ़ जिले हाथी के उत्पात से आक्रांत हैं।
दूसरी ओर हाल ही में राज्य के रायगढ़ जिले के ध्र्मजयगढ़ क्षेत्र के एडु जंगल में एक मादा हाथी की मौत बिजली तार के चपेट में आने से हो गयी। गत तीन माह में विद्युत स्पर्शाघात में तीन हाथियों की मृत्यु हो चुकी है।
पर्यावरणवादियों की मानें तो हाथियों के गांव बसाने की योजना को राज्य सरकार साकार स्वरूप प्रदान करती तो इस वन्य प्राणी एवं आम जन दोनों की समुचित सुरक्षा संभव हो पाती।
36गढ़ डाट इन