मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अधिकारियों से कहा कि गर्मियों के लिए नियमित पेयजल आपूर्ति की सभी पूर्व तैयारियां तत्काल शुरू की जानी चाहिए।
रायपुर 05 फरवरी (36गढ़ डाट इन)-मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आने वाले गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को राज्य के सभी जिलों में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करने और जरूरत वाले इलाकों में हैण्ड पम्पों और नलजल योजनाओं से संबंधित तकनीकी खामियों को अभी से दुरूस्त कर लेने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गर्मियों के लिए नियमित पेयजल आपूर्ति की सभी पूर्व तैयारियां तत्काल शुरू की जानी चाहिए।
डॉ. सिंह ने आज यहां कहा कि चालू महीने के तीसरे सप्ताह के बाद राज्य के सभी जिलों में कलेक्टरों द्वारा जल उपयोगिता समितियों की बैठक ली जाएगी और स्थिति की समीक्षा के बाद जरूरत के हिसाब से तालाबों को नहरों के जरिए भरने के उपाय भी किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि गर्मियों में शहरों और गांवों में जनता को पेयजल के लिए किसी भी प्रकार की दिक्कत न होने पाए।
डॉ. सिंह ने अधिकारियों को सूखा ग्रस्त घोषित 50 तहसीलों में पेयजल प्रबंधन पर विशेष रूप से ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले मानसून के दौरान प्रदेश के जिन इलाकों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, वहां स्थानीय जरूरत के अनुसार नलकूप खनन का काम तत्काल शुरू किया जाए।
इसके अलावा जिन नलकूपों में भू-जल स्तर नीचे चला गया है, वहां राईजर पाईप डालने का कार्य भी जल्द से जल्द हाथ में लिया जाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि जिन गांवों में पानी के स्त्रोत गर्मियों में सूख जाएंगे, वहां टैंकरों से भी जनता के लिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
डॉ. सिंह ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को स्थानीय बरसाती नालों में पानी रोकने के लिए नाला बंधान का कार्य हाथ में लेने के निर्देश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने खरीफ वर्ष 2009 की वास्तविक आनावारी रिपोर्ट के आधार पर नौ जिलों की 50 तहसीलों को सूखा ग्रस्त घोषित किया है।
पिछले साल 28 अगस्त को राजस्व विभाग द्वारा खरीफ फसलों की नजरी आनावारी के आधार पर प्रदेश के 12 जिलों की 66 तहसीलों को सूखा ग्रस्त घोषित किया गया था, लेकिन अब सभी जिलों से आनावारी की वास्तविक रिपोर्ट आने के बाद इसमें संशोधन करते हुए 50 तहसीलों को सूखा ग्रस्त माना गया है।
इनमें रायपुर जिले के अन्तर्गजत भाटापारा, बलौदाबाजार, कसडोल और बिलाईगढ़, दुर्ग जिले के अन्तर्गत साजा, बेमेतरा, नवागढ़, डोंडीलोहारा, पाटन, धमधा, डौंडी, थान-खम्हरिया और दुर्ग, जिला राजनांदगांव के अन्तर्गत छुईखदान, खैरागढ़, डोंगरगढ़, राजनांदगांव, छुरिया, अम्बागढ़ चौकी, मोहला, मानपुर और डोंगरगांव है।
उसी तरह जिला कबीरधाम के अन्तर्गत कवर्धा, पंडरिया, बोड़ला और सहसपुर-लोहारा, जिला दक्षिण्ा बस्तर (दंतेवाड़ा) के अन्तर्गत दंतेवाड़ा, कोण्टा, गीदम, कटेकल्याण, कुआंकोण्डा, सुकमा और छिंदगढ़, जिला उत्तर बस्तर (कांकेर) के अन्तर्गत अंतागढ़, जिला बिलासपुर के अन्तर्गत मस्तूरी, मरवाही, लोरमी, मुंगेली, पेण्ड्रारोड, पेण्ड्रा और पथरिया, को सामिल किया गया है ।
सामिल किये गए अन्य स्थानों मैं है जिला कोरिया के अन्तर्गत बैकुंठपुर, सोनहत, खड़गवां, मनेन्द्रगढ़ और भरतपुर तथा जिला बीजापुर के अन्तर्गत बीजापुर, भोपालपट्टनम, भैरमगढ़ और उसूर तहसील।
इसके अलावा दुर्ग जिले की गुंडरदेही तहसील के 36 गांवों को भी वास्तविक आनावारी के आधार पर सूखा ग्रस्त घोषित किया गया है।
36गढ़ डाट इन